Tripura: त्रिपुरा में 'एकला' चलेगी भाजपा, अपने बूते आगे बढ़ने की बना रही रणनीति

Welcome to Kalam Kartvya - एन अर्जुन, गुवाहाटी। Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 14 Oct 2022 01:31 PM IST सार Tripura: पार्टी के रणनीतिकारों का मनना है कि दूसरी पार्टियों का सहारा खोजने की बजाय अपना जनाधार मुजबूत बनाएं और खुद के दम पर चुनाव लड़ें। कुछ समय पहले पार्टी महासचिव बीएल संतोष ने त्रिपुरा का दौरा किया था और उन्होंने भी इसी तरह के संकेत दिए थे कि पार्टी को अपने बल पर चुनाव लड़ना चाहिए... Tripura CM Manik Saha with former CM Biplab Kumar Deb and Union Minister Bhupender Yadav - फोटो : Agency (File Photo) ख़बर सुनें विस्तार आगामी विधानसभा चुनाव में मेघालय में भाजपा सभी 60 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। इसके बाद अब यह माना जा रहा है कि त्रिपुरा में भी भाजपा 'एकला चलो' की नीति पर चलेगी। पार्टी के वरिष्ठ नेता यह मानकर चल रहे हैं क्योंकि मेघालय की अपेक्षा त्रिपुरा में पार्टी का जनाधार बढ़ा है और स्थिति मजबूत हुई है। डबल इंजन की सरकार होने के कारण वहां पर विकास के काम तेजी से हो रहे हैं। दूसरी ओर, महाराष्ट्र और बिहार से सबक लेते हुए, पार्टी को अपने ही दम पर चुनाव लड़ने का मन बना रही है। इस बीच, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, पार्टी महासचिव बीएल संतोष और प्रभारी व पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ महेश शर्मा सहित कई लोगों ने त्रिपुरा का दौरा कर वहां की जनता का नब्ज टटोलने की कोशिश की। '; if(typeof is_mobile !='undefined' && is_mobile()){ googletag.cmd.push(function() { googletag.display('div-gpt-ad-1514643645465-2'); }); } elImageAd.innerHTML = innerHTML; elImageAd.className ='ad-mb-app width320 hgt270 mt-10 for_premium_user_remove pwa_for_remove'; } if(showVideoAd == true){ let elImageAd = document.getElementById("showVideoAd"); elImageAd.innerHTML = 'Trending Videos'; anyviewAd(); elImageAd.className ='clearfix ad-mb-app mt-10 for_premium_user_remove pwa_for_remove'; } function anyviewAd(){ let scriptEle = document.createElement("script"); let elImageAd = document.getElementById("showVideoAd"); scriptEle.setAttribute("src", "https://tg1.aniview.com/api/adserver/spt?AV_TAGID=631f2083311a510081136005&AV_PUBLISHERID=62d66949dc3de81859122a54"); scriptEle.setAttribute("type", "text/javascript"); scriptEle.setAttribute("async", "async"); scriptEle.setAttribute("data-content.cms-type","playlist"); scriptEle.setAttribute("data-content.cms-id","63201c80e4c07cb236059cd2"); scriptEle.setAttribute("id","AV631f2083311a510081136005"); elImageAd.appendChild(scriptEle); } पार्टी के रणनीतिकारों का मनना है कि दूसरी पार्टियों का सहारा खोजने की बजाय अपना जनाधार मुजबूत बनाएं और खुद के दम पर चुनाव लड़ें। कुछ समय पहले पार्टी महासचिव बीएल संतोष ने त्रिपुरा का दौरा किया था और उन्होंने भी इसी तरह के संकेत दिए थे कि पार्टी को अपने बल पर चुनाव लड़ना चाहिए। हालांकि, त्रिपुरा के नवनियुक्त भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव भट्टाचार्जी ने कहा, पार्टी आईपीएफटी के साथ अपने मौजूदा गठबंधन को जारी रखेगा या नहीं इस पर अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान करेगा। हालांकि इसके साथ ही भट्टाचार्जी ने कहा, भाजपा हमेशा अपने सहयोगियों के साथ सम्मान के साथ पेश आती है। लेकिन माना यही जा रहा है कि त्रिपुरा में पार्टी अकेली चुनाव लड़गी। अभी यह है त्रिपुरा में भाजपा की स्थिति त्रिपुरा में भाजपा ने 2018 के विधानसभा चुनाव में 25 वर्ष पुरानी वाममोर्चा सरकार को उखाड़ फेंका था और बिप्लब कुमार देव के नेतृत्व में भाजपा ने वहां पहली बार सरकार बनाई थी। त्रिपुरा में विधानसभी की 60 सीटें हैं भाजपा ने 51 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और 36 सीटों पर कब्जा जमाया था। उनकी सहयोगी पार्टी इंडिजिनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के आठ विधायक हैं। कांग्रेस यहां जीरो है और सीपीएम के 16 विधायक हैं। चुनाव से एन पहले बदल दिया मुख्यमंत्री त्रिपुरा में भाजपा के अंदर सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है था। शायद इसी के चलते त्रिपुरा में भाजपा ने चुनाव से करीब छह महीने पहले जीत के नायक रहे मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को रातों-रात बदल दिया और उनको राज्यसभा भेज दिया। उनकी जगह डेंटल सर्जन डॉ. माणिक शाह को मुख्यमंत्री बनाया गया। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि यह कोई आसान फैसला नहीं था। पार्टी को मजबूत और जीत निश्चित करने के लिए ही भाजपा ने इतना बड़ा फैसला किया लेकिन इसका पता तो चुनाव नतीजों के बाद ही पता चल पाएगा। 60 में से 30 एससी-एसटी सींटें, इन पर सबसे ज्यादा ध्यान त्रिपुरा में 10 सीटें एससी की हैं, इनमें से पिछली बार चुनाव में आठ सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। इसी तरह से 20 एसटी सीटों में से 11 पर भाज

Tripura: त्रिपुरा में 'एकला' चलेगी भाजपा, अपने बूते आगे बढ़ने की बना रही रणनीति
Welcome to Kalam Kartvya -
एन अर्जुन, गुवाहाटी। Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 14 Oct 2022 01:31 PM IST

सार

Tripura: पार्टी के रणनीतिकारों का मनना है कि दूसरी पार्टियों का सहारा खोजने की बजाय अपना जनाधार मुजबूत बनाएं और खुद के दम पर चुनाव लड़ें। कुछ समय पहले पार्टी महासचिव बीएल संतोष ने त्रिपुरा का दौरा किया था और उन्होंने भी इसी तरह के संकेत दिए थे कि पार्टी को अपने बल पर चुनाव लड़ना चाहिए...

Tripura CM Manik Saha with former CM Biplab Kumar Deb and Union Minister Bhupender Yadav

Tripura CM Manik Saha with former CM Biplab Kumar Deb and Union Minister Bhupender Yadav - फोटो : Agency (File Photo)

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विस्तार

आगामी विधानसभा चुनाव में मेघालय में भाजपा सभी 60 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। इसके बाद अब यह माना जा रहा है कि त्रिपुरा में भी भाजपा 'एकला चलो' की नीति पर चलेगी। पार्टी के वरिष्ठ नेता यह मानकर चल रहे हैं क्योंकि मेघालय की अपेक्षा त्रिपुरा में पार्टी का जनाधार बढ़ा है और स्थिति मजबूत हुई है। डबल इंजन की सरकार होने के कारण वहां पर विकास के काम तेजी से हो रहे हैं। दूसरी ओर, महाराष्ट्र और बिहार से सबक लेते हुए, पार्टी को अपने ही दम पर चुनाव लड़ने का मन बना रही है। इस बीच, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, पार्टी महासचिव बीएल संतोष और प्रभारी व पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ महेश शर्मा सहित कई लोगों ने त्रिपुरा का दौरा कर वहां की जनता का नब्ज टटोलने की कोशिश की।

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पार्टी के रणनीतिकारों का मनना है कि दूसरी पार्टियों का सहारा खोजने की बजाय अपना जनाधार मुजबूत बनाएं और खुद के दम पर चुनाव लड़ें। कुछ समय पहले पार्टी महासचिव बीएल संतोष ने त्रिपुरा का दौरा किया था और उन्होंने भी इसी तरह के संकेत दिए थे कि पार्टी को अपने बल पर चुनाव लड़ना चाहिए। हालांकि, त्रिपुरा के नवनियुक्त भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव भट्टाचार्जी ने कहा, पार्टी आईपीएफटी के साथ अपने मौजूदा गठबंधन को जारी रखेगा या नहीं इस पर अंतिम फैसला पार्टी आलाकमान करेगा। हालांकि इसके साथ ही भट्टाचार्जी ने कहा, भाजपा हमेशा अपने सहयोगियों के साथ सम्मान के साथ पेश आती है। लेकिन माना यही जा रहा है कि त्रिपुरा में पार्टी अकेली चुनाव लड़गी।

अभी यह है त्रिपुरा में भाजपा की स्थिति

त्रिपुरा में भाजपा ने 2018 के विधानसभा चुनाव में 25 वर्ष पुरानी वाममोर्चा सरकार को उखाड़ फेंका था और बिप्लब कुमार देव के नेतृत्व में भाजपा ने वहां पहली बार सरकार बनाई थी। त्रिपुरा में विधानसभी की 60 सीटें हैं भाजपा ने 51 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे और 36 सीटों पर कब्जा जमाया था। उनकी सहयोगी पार्टी इंडिजिनस पीपल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के आठ विधायक हैं। कांग्रेस यहां जीरो है और सीपीएम के 16 विधायक हैं।

चुनाव से एन पहले बदल दिया मुख्यमंत्री

त्रिपुरा में भाजपा के अंदर सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है था। शायद इसी के चलते त्रिपुरा में भाजपा ने चुनाव से करीब छह महीने पहले जीत के नायक रहे मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को रातों-रात बदल दिया और उनको राज्यसभा भेज दिया। उनकी जगह डेंटल सर्जन डॉ. माणिक शाह को मुख्यमंत्री बनाया गया। राजनीतिक जानकार बताते हैं कि यह कोई आसान फैसला नहीं था। पार्टी को मजबूत और जीत निश्चित करने के लिए ही भाजपा ने इतना बड़ा फैसला किया लेकिन इसका पता तो चुनाव नतीजों के बाद ही पता चल पाएगा।

60 में से 30 एससी-एसटी सींटें, इन पर सबसे ज्यादा ध्यान

त्रिपुरा में 10 सीटें एससी की हैं, इनमें से पिछली बार चुनाव में आठ सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था। इसी तरह से 20 एसटी सीटों में से 11 पर भाजपा ने जीत दर्ज कराई थी। भाजपा का पूरा ध्यान इन वोटरों पर हैं, कहीं ये वोटर छिटक कर दूसरी पार्टी की तरफ चले नहीं जाएं। इसलिए पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा हो या फिर पार्टी के महासचिव स्तर के नेता या पूर्व केंद्रीय मंत्री लगातार त्रिपुरा का दौरा कर रहे हैं।

- By Kalam Kartvya.