बीबीसी नाम जोडकर, पत्रकार मार्क टूली के नाम फेल न्यूज

फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप, ऐसे अन्य सोशल मीडिया फर्जी खबरें फैलाने में प्रमुख हैं। खबरों की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। फेसबुक भी फेक न्यूज का अड्डा बन गया है। फेक न्यूज को लेकर मीडिया, टीवी और डिजिटल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लेकिन लोगों का अब भी अखबारों पर भरोसा है। कांग्रेस, मोदी के आलोचक, सरदार पटेल, जवाहरलाल नहेरू के फेल न्यूज ज्यादा फेलाया जा रहा है।

बीबीसी नाम जोडकर, पत्रकार मार्क टूली के नाम फेल न्यूज
Fake news of Mark Tully was caught in the name of BBC to spread illusion in the name of Modi

17 सितंबर को, मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क में एक चीते को रिहा करते समय प्रधान मंत्री द्वारा इस्तेमाल किए गए कैमरे की एक तस्वीर वायरल हुई, जिसका लेंस कवर नहीं हटाया गया था। यह फेक न्यूज थी। क्योंकि कैमरा लेंस खुला है। ढक्कन हटा दिया गया।

 प्रधानमंत्री के साथ जो हुआ वह ज्यादातर दूसरे लोगों के साथ हो रहा है। बीजेपी गैंग ऐसी खबरें ज्यादा फैलाता है।

मोदी ने पुराने दीमक से पीड़ित एक पुराने बरगद के पेड़ को नष्ट कर दिया। मार्क टुली के नाम से एक झूठा लेख वायरल हो गया है। पाठ नेहरू की आलोचना करता है। ईसे पता चलता है कि कौन फेक न्यूझ फैला रहा है।

फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप, ऐसे अन्य सोशल मीडिया फर्जी खबरें फैलाने में प्रमुख हैं। खबरों की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। फेसबुक भी फेक न्यूज का अड्डा बन गया है। फेक न्यूज को लेकर मीडिया, टीवी और डिजिटल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लेकिन लोगों का अब भी अखबारों पर भरोसा है। कांग्रेस, मोदी के आलोचक, सरदार पटेल, जवाहरलाल नहेरू के फेल न्यूज ज्यादा फेलाया जा रहा है।

अफवाह फैलाने वालों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। फेक न्यूज ने अब भारतीय मीडिया पर कब्जा कर लिया है।

अर्जुन सिद्धार्थ ने एक फेक न्यूज का अन्वेषण किया है।  

भारत में बीबीसी के लिए काम कर चुके जाने-माने पत्रकार मार्क टुली के एक लेख को सोशल मीडिया पर 'दीमक से पीड़ित पुराने बरगद के पेड़ों को नष्ट करने वाले मोदी' शीर्षक से गलत सूचना चाहने वाले लोगों द्वारा व्यापक रूप से साझा किया गया है। लेकिन असल में पत्रकार मार्क टुली ने अपनी किताब में ऐसा कुछ नहीं लिखा।

पाठ नेहरू की आलोचना करता है।

टुली की किताब - फुल स्टॉप्स इन इंडिया के शीर्षक में लेखन के शब्द प्रमुखता से दिखाई देते हैं। मार्क टुली बीबीसी के नई दिल्ली ब्यूरो प्रमुख थे। उन्होंने 1965 में रेडियो के लिए भारत संवाददाता के रूप में अपना करियर शुरू किया।

"मोदी ने दीमक से पीड़ित पुराने बरगद के पेड़ को नष्ट किया" - मोदी पर मार्क टुली

इसी नाम से लेख प्रसारित किया गया है।

कई दशकों से बीबीसी के भारत संवाददाता मार्क टुली मोदी के शासन में हो रहे बदलावों के बारे में लिख रहे हैं.

अपनी पुस्तक "नो फुल स्टॉप्स इन इंडिया" में परिवर्तन की चर्चा करते हुए वे लिखते हैं -

भारत में बदलाव में लंबा समय लगता है। नई व्यवस्था का जन्म हो सकता है।

वह आगे कहते हैं कि - अपनी सभी महान उपलब्धियों के लिए नेहरू वंश बरगद के पेड़ की तरह खड़ा है, भारत के लोगों और संस्थानों पर छाया हुआ है, और सभी भारतीय जानते हैं कि बरगद के पेड़ के नीचे कुछ भी नहीं उगता है।

जैसा कि मार्क ने कहा, परिवर्तन धीमा और दर्दनाक होगा, इसलिए जो कोई भी पढ़ता नहीं है और मान्यताओं के आधार पर निर्णय नहीं लेता है, वह या तो कुछ समय के लिए परिवर्तन नहीं देखेगा या यह दिखावा करेगा कि कुछ भी नहीं बदल रहा है।

रेलवे, बिजली क्षेत्र, रक्षा उत्पादन और शासन में जिस तरह से बदलाव हो रहे हैं, साथ ही पुरानी ताकतों की नाराजगी यह दर्शाती है कि बदलाव की प्रक्रिया धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से शुरू हुई है और दर्दनाक होने वाली है।

पुराने बरगद के पेड़ की क्षमताओं को कम न समझें। पुरानी शक्तियां स्वाभाविक रूप से मर जाएंगी।

इसमें मैं और जोड़ दूं- मीडिया हर दिन आपके चेहरे पर जो नई हलचल करता है, वह उन सभी ताकतों द्वारा किया जाता है जो मोदी सरकार को उखाड़ फेंकना चाहते हैं, क्योंकि मोदी ने उन्हें उखाड़ फेंका है। वे पानी से बाहर मछली की तरह हैं।

समय आ गया है कि आप उस व्यक्ति का समर्थन करते रहें और अपने विश्वास को अक्षुण्ण रखें। हम निश्चित रूप से एक नया भारत देखेंगे - बेहतर, बेहतर, मजबूत, भ्रष्टाचार मुक्त, शांतिपूर्ण, बेहतर जीवन स्तर वाले समृद्ध लोग।

- मार्क टुली.

इस टेक्स्ट को कई अलग-अलग यूजर्स ने फेसबुक पर शेयर किया है। इसे ट्विटर पर भी पोस्ट किया गया है। लेकिन मार्क टुली ने वास्तव में ऐसा कुछ नहीं लिखा था। पाठ पिछली कांग्रेस सरकारों, विशेषकर नेहरू की आलोचना करता है, और नई सरकार, नरेंद्र मोदी की परोक्ष रूप से प्रशंसा करता है। वो भी एक पत्रकार के नाम पर।

जब ऑल्ट न्यूज़ ने इस मामले की पड़ताल की तो पता चला कि यह मैसेज किसी गलत के नाम से वायरल हुआ था।

जांच में पता चला कि मार्क टुली द्वारा लिखा गया लेख उनकी किताब 'नो फुल स्टॉप्स इन इंडिया' में कहीं नहीं मिलता। सच्चाई को उजागर करने के लिए जाने वाले ऑल्ट न्यूज़ ने जब जांच की और मार्क टुली से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा कि उनके नाम से प्रसारित किया जा रहा लेख फर्जी था। यह मेरे द्वारा बनाया गया कथित रूप से नकली लेख है। आप इसे बाहर लाये, उसके लिए मैं आपका बहुत आभारी रहूंगा। टुली ने ऑल्ट न्यूज़ को एक ईमेल में लिखा।

यह पहली बार नहीं है जब कुछ प्रमुख राजनीतिक दलों और राजनीतिक संगठनों द्वारा किसी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए मार्क टुली के नाम का इस्तेमाल किया गया है। इससे पहले जुलाई 2018 में, जब कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पेश किया, तो गांधी परिवार और टुली की आलोचना करने वाले एक 'लेख' को झूठा फेलाया गया था।

इस प्रकार मार्क टूली को कुछ लोगों द्वारा व्यवस्थित रूप से निशाना बनाया जाता है या उनके नाम पर गलत सूचना फैलाई जाती है।

पिछले 8 सालों में फेक न्यूज का चलन अचानक बढ़ा है। जब से मोदी पर आए हैं।

5 साल पहले

भारत में अफवाह फैलाने वालों की संख्या बढ़ी है।

सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सचिन तेंदुलकर के एक साथ बैठकर बात करने की एक तस्वीर खूब वायरल हुई थी। दीवार पर मुकेश और नीता अंबानी की तस्वीर थी। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री कार्यालय में एक कारोबारी की तस्वीर वायरल हो गई।

कैसे बनती है फेक न्यूज?

व्हाट्सएप, ट्वीट्स या फेसबुक पर पुराने वीडियो, फोटोशॉप्ड तस्वीरें या फर्जी सोशल मीडिया आईडी बनाकर विवाद पैदा किया जाता है। लोग इस बात की परवाह किए बिना एक-दूसरे को भेजते रहते हैं कि तस्वीर, वीडियो या मैसेज वाकई असली है या नहीं। यह किसी को लाभ पहुंचाने या किसी को बदनाम करने के लिए एक लंबा रास्ता तय करता है।

न्यूज वेबसाइट और 24 घंटे न्यूज टीवी चैनल अफवाह फैलाने वालों में सबसे आगे हैं। लोग इसे मानते भी हैं। फेक न्यूज के जरिए अफवाहें फैलने लगती हैं।

ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन (एबीसी) के अनुसार, 2006 में प्रिंट सर्कुलेशन 3.91 करोड़ प्रतियां थी। 2016 तक यह बढ़कर 6.28 करोड़ और फिर 8 करोड़ हो गया। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सशुल्क समाचार पत्रों का प्रसार ज्वार में 2 से 12% की कमी दर्ज की गई है। भारत में भी लोग अब फेक न्यूझ और पेड न्यूझ को अच्छी तरहसे पहचान ने लगे है। थेंक्स टु ओल्ट न्यूझ।