एक केस का फेंसला 4 मिनट की नई सिस्टम से करे, सुप्रीम कोर्ट के जजों ने कहा ना मूमकिन

सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने उनकी व्यवस्था पर सवाल उठाये है। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एएस ओकानी की पीठ ने कहा कि नई लिस्टिंग प्रणाली में मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को नये केस की सुनवाई का प्रावधान है। लेकिन ऐसे में उन्हें किसी भी मुद्दे पर फैसला लेने के लिए बहुत कम समय मिलता है। एक केस 4 मिनिटमां फेंसला होजाना चाहिये।

एक केस का फेंसला 4 मिनट की नई सिस्टम से करे, सुप्रीम कोर्ट के जजों ने कहा ना मूमकिन

सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने उनकी व्यवस्था पर सवाल उठाये है। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एएस ओकानी की पीठ ने कहा कि नई लिस्टिंग प्रणाली में मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को नये केस की सुनवाई का प्रावधान है। लेकिन ऐसे में उन्हें किसी भी मुद्दे पर फैसला लेने के लिए बहुत कम समय मिलता है। एक केस 4 मिनिटमां फेंसला होजाना चाहिये।

CJI उदय उमेश ललित ने अपने पहले दिन 900 याचिकाओं को सूचीबद्ध किया। जिसमें हिजाब विवाद, सिद्दीकी कप्‍पन, गौतम नवलखा समेत कई मामले शामिल हैं। CJI ने लगभग 60 मामलों को 15-15 पीठों को सौंपा। यानी कुल 900 मामलों को सुनवाई करने के किये रखा है।

 इन नये आवेदनों के निस्तारण के लिए प्रातः 10.30 बजे से सायं 4 बजे तक अधिकतम 270 मिनट का समय उपलब्ध है। नई व्यवस्था में एक मामले को निपटाने में औसतन 4 मिनट का समय लगता है। जस्टिस एमआर शाह की अध्यक्षता वाली बेंच को अधिकतम 65 याचिकाएं भेजी गईं।

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एएस ओका की पीठ ने इस मुद्दे पर असहमति जताई। कहा गया कि मामलों की अधिकता के कारण पीठ पर दबाव बढ़ रहा है। अगर समय नहीं है तो बेंच कैसे फैसला करेगी। नई व्यवस्था में पीठ के पास मामले की सुनवाई के लिए बिल्कुल भी समय नहीं है।

न्यायाधीशों को मामलों की जांच के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल रहा है। बड़ी बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में ऐसी घटना शायद ही कभी सामने आती है।

जस्टिस कौल के लिखित आदेश में कहा गया है कि नई लिस्टिंग प्रणाली मौजूदा मामले की तरह सुनवाई के लिए निर्धारित मामलों पर विचार करने के लिए पर्याप्त समय नहीं देती है। इसका कारण 'दोपहर' सत्र में आने वाले मामलों की संख्या है।

मुख्य न्यायाधीश यू ललित असमंजस की स्थिति में हैं। एनवी रमन के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने देश के 49वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाला।

जस्टिस रमन ने अपनी सेवानिवृत्ति के बाद कहा कि वकील अक्सर शिकायत करते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में नई याचिकाएं सुनवाई के लिए नहीं आती हैं। ने सूचीबद्ध करने की एक नई प्रथा शुरू की है जिसकी साथी न्यायाधीशों द्वारा खुले तौर पर आलोचना की गई है।

सुप्रीम कोर्ट के सभी 30 जजों के लिए दो शिफ्ट की गई है। इस नई व्यवस्था के तहत वे सोमवार से शुक्रवार तक प्रतिदिन 60 मामलों की सुनवाई कर रहे हैं, 15 अलग-अलग बेंच में बैठकर नए मामलों की सुनवाई कर रहे हैं।

तीन जजों की बेंच के सभी जजों ने मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को सुबह 10.30 बजे से दोपहर 1 बजे तक पहली पाली में पुराने मामलों की सुनवाई की।

दोपहर की दूसरी पाली में दो जजों की बेंच को 30 मामले दिए गए, जिन पर दो घंटे में सुनवाई होनी थी। यानी औसतन 4 मिनट में एक केस का निपटारा किया जाना था।

कोर्ट के सभी 30 जजों के लिए दो शिफ्ट की गई है। न्यायाधीश सोमवार से शुक्रवार तक नए मामलों की सुनवाई के लिए 15 अलग-अलग बेंचों में बैठते हैं, प्रतिदिन 60 से अधिक मामलों की सुनवाई करते हैं।

 तीन जजों की बेंच को पुराने मामलों की सुनवाई मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को पहली पाली में सुबह 10.30 बजे से दोपहर 1 बजे तक करनी है। फिर दूसरी पाली में दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे तक दो जजों की बेंच होती है। 30 मामले दिए गए, जिनकी सुनवाई 120 मिनट में पूरी होनी थी। प्रत्येक मामले को लगभग 4 मिनट में निपटाया जाना था।

CJI ने मंगलवार से मामलों की संख्या 30 से घटाकर 20 कर दी।

शुक्रवार को दो जजों की बेंच ने सुनवाई स्थगित करने से इनकार कर दिया। न्यायाधीशों ने कहा कि उन्होंने पूरे मामले की फाइल को पढ़ने के लिए देर शाम तक काम किया।

केस पढ़ने का समय नहीं मिला। वकील ने बार-बार सुनवाई की अगली तारीख मांगी, लेकिन जजों ने उसकी अपील खारिज कर दी। कहा कि नई लिस्टिंग व्यवस्था के बाद तय तारीखों पर सुनवाई मुश्किल हो गई है।

न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित दो महीने के लिए प्रधान के रूप में आए। उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों के कुल 34 पद हैं और वर्तमान में 32 न्यायाधीश कार्यरत हैं।

जस्टिस खानविलकर अपने ऐतिहासिक फैसलों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में 24 जून को उन्होंने गुजरात दंगों में एसआईटी द्वारा दी गई क्लीन चिट पर मुहर लगाने का फैसला किया था।

9 नवंबर, 2022 को, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति ललित को सीजेआई के रूप में सफल करेंगे और उनका कार्यकाल 10 नवंबर, 2024 को समाप्त होगा। सुप्रीम कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी हैं, जो 23 सितंबर को सेवानिवृत्त होने वाली हैं, और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता, जो 16 अक्टूबर, 2022 को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।