कौन खींच रहा है, माननीय की ऐसी वैसी तस्वीरें ?

उस फोटोग्राफर की तलाश जारी है जिसने देश के माननीय साहिब का ऐसा फोटोशूट किया

कौन खींच रहा है, माननीय की ऐसी वैसी तस्वीरें   ?

चीते आए कूनो अभयारण्य में ठिकाना ढ़ूढने चल दिए पर उस फोटोग्राफर की तलाश जारी है जिसने देश के माननीय साहिब का ऐसा फोटोशूट किया जिसमें  कैनन का कैमरा पकड़े चीते की रिहाई का फोटो लेने वे व्याकुल नज़र आ रहे हैं मगर कैमरे का शटर बंद है । वे कैनन कंपनी का कैमरा इस मुद्रा में पकड़े हैं जैसे उन्हें चीता नज़र आ रहा हो? ऐसी उनकी कई फोटो हो सकते हैं जो वह सिर्फ फोटो शूट का ख्याल रखते हुए खिंचाते हैं।यह उनका निजी शौक है चूंकि कैमरे से उन्हें जबरदस्त लगाव है। इसे लोग उनकी कमजोरी मान लेते हैं यह ग़लत है। कम से कम साहिब के शौक में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

वैसे पिछले वर्ष से फोटो शूट के साहिब से जुड़े ऐसे वैसे मामले तेजी से सामने आने लगे हैं अब ये फोटो दिखाने की क्या ज़रुरत कि साहब किसी गणमान्य अतिथि को हटाकर अपना चेहरा सामने लगा देते हैं। एक उनका चित्र बहुत वायरल हुआ वे तोते को अपने हाथ पर बैठाने बेताब हैं और तोता है कि उनके सुरक्षा अधिकारी के हाथ पर तो बैठ जाता है लेकिन कई कोशिशों के बाद भी वह साहब के हाथ पर बैठना पसंद नहीं करता।कहते हैं कि खग जाने की खग की ही भाषा।इस चित्र को दिखाकर  सीधे-सीधे आप उन्हें कटघरे में खड़ा करते हैं।यह उचित नहीं।वे यदि कोई गलती जुबान फिसलने की कर देते हैं तो उसको फौरन रोकने की व्यवस्था होनी चाहिए वरना वहीं होता रहेगा जैसा राहुल की एक गलती के बाद ऐसे वीडियो और चित्रों की झड़ी लग गई।ये सब क्या है ?ज़बान सबकी जब तब फिसल जाती है पर इतना तमाशा होना सरासर गलत है।

इसी तरह विदेश में एक मीट में साहिब का टेलीप्राम्पटर बिगड़ गया साहिब लड़खड़ा गए उनकी फजीहत हो गई ।कुछ देर उन्होंने बगलें झांकते हुए मामला संभालने की कोशिश की किंतु वे स्थिति संभाल नहीं सके क्योंकि ये उनकी कमज़ोरी हम सब जानते हैं विदेशी नहीं जानते। एक चित्र और याद आता है जब साहिब ने रौब गालिब करने बंद फाईल पर कुछ लिखते हुए फोटो शूट कराया पर वह इतनी बारीकी से लिया गया कि साहिब की पोल पट्टी खुल गई एक तो बंद फाईल और तिस पर कलम को सिर्फ इस अंदाज़ में चलाया जा रहा था जो फाईल पर चल ही नहीं रही थी।

ऐसा लगता है कि आजकल कोई टुकड़े टुकड़े गैंग इनके कैंप में पहुंच गई है जो साहिब की छवि को धूमिल करने में लगी हुई है।अब चीता की म्याऊं म्याऊं सुनाने और दिखाने की क्या ज़रुरत थी।सारा चीता देखने और झूमकर आनंद लेने का उत्साह ठंडा गया।कटाक्ष शुरू हो गए यह छप्पन इंची की म्याऊं म्याऊं है।शेर तो दक्षिणायन में दहाड़ रहा है। साहिब को चाहिए कि वे अपने दफ्तर में प्रविष्ट इस गैंग पर सख़्त कार्रवाई करें। मुनासिब समझें तो ये आदेश जारी करवा दें कि  उनके दफ्तर से जारी चित्र, वीडियो और वक्तव्य ही छापे और दिखाएं जाएं।इसका उल्लंघन करने वालों को राष्ट्रद्रोही माना जायेगा।

यह बहुत ज़रूरी और गंभीर बात है देश की प्रतिष्ठा को इस तरह बेइज्जत नहीं किया जा सकता है। हमारे लोकतंत्र की यही तो खासियत है इसमें ऐरै गैरे नत्थू खैरे सब साहिब बन सकते हैं किन्तु राष्ट्र के सम्मान का ख्याल तो हमें ही रखना होगा। आजकल तकनीक के ज़रिए भी बहुत सी गड़बड़ियां  की जा रही हैं उसको आई टी सेल ही अंजाम दे रहा है उस पर अब लगाम लगाना ज़रुरी हो गया है क्योंकि ये हथियार अब विपक्ष के पास भी पहुंच चुका है। इसलिए इसको बंद कराना ही उचित और देशहित में होगा। गूगल ने दुनिया को बहुत करीब ला दिया है  सेकेन्डों में काम तमाम होता है। कुछ लोग तो जियो के प्रचारक साहिब की याद करते हुए  कैनन केमरे के प्रचारक रुप में साहिब को ले रहे हैं।

इंसान के अपने शौक और तौर तरीके होते हैं साहिब पर ,वह देश की प्रतिष्ठा से खिलवाड़ नहीं कर सकते।इस तरह की गैंग को नेस्तनाबूद करने का बीड़ा उठाईए यह ज़रूरी है।

BY,   सुसंस्कृति परिहार