चीन से दोस्ती का ढोंग पड़ा बहुत महंगा राहुल चले भारत जोड़ने, उधर हो गया...............

LAC पर डेपसचॉक इलाके को लेकर दोनों देशों की सेनाओं के बीच अभी भी गतिरोध कायम

चीन से दोस्ती का ढोंग पड़ा बहुत महंगा राहुल चले भारत जोड़ने, उधर हो गया...............

इधर 7 सितंबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की कन्याकुमारी से 'भारत जोड़ो यात्रा' शुरू हुई उधर 8 सितंबर को भारत और चीन की सेनाओं ने ईस्टर्न लद्दाख के गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स (पेट्रोलिंग प्वाइंट-15) को लेकर बातचीत की। इस बातचीत के बाद दोनों देशों ने इस इलाके से पीछे हटना शुरू कर दिया है।

अप्रैल 2020 के अपने अतिक्रमणों के बाद से चीन ने बड़ी चालाकी से भारत को लद्दाख क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर उसके कब्जे को स्वीकार करने को मजबूर करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत का इस्तेमाल किया है। इससे उत्पन्न नई स्थिति में इस बफर ज़ोन में भारत ने न केवल उन क्षेत्रों तक अपनी पहुंच खो दी है, जहां पहले भारतीय सैनिक गश्त करते रहे हैं, बल्कि उन्हें पीछे हटने के लिए भी मजबूर होना पड़ा है।

यह कहना है जाने-माने रक्षा व विदेशी मामलों के विशेषज्ञ तथा लेखक ब्रह्म चेलानी का। उनका कहना है कि चीन से हुए समझौते में भारत ने काफी कुछ खो दिया है।

उन्होंने अपने ट्वीट में कहा है कि लद्दाख में चारों भारतीय सीमा क्षेत्र आकार में सिकुड़ गए हैं और यह क्षेत्रीय परिवर्तित यथास्थिति चारों बफर जोन में से प्रत्येक में चीन को सैन्य लाभ देती है क्योंकि भारत ने चीन द्वारा छीने गये बफ़र्स को स्वेच्छा से स्वीकार कर लिया है, जो इसके सैन्य विकल्पों को कम कर देते हैं।

चेलानी ने कहा कि भारत ने इन इलाकों में पारंपरिक रूप से गश्त की थी। अब गोगरा-हॉट स्प्रिंग्स में भी ऐसा ही होगा, जिसमें भारत को पेट्रोलिंग प्वाइंट 15 में नए प्रतिरोध का सामना करना होगा। यहां पर पहले जैसी स्थिति भी संभव नहीं लगती है।

हालांकि LAC पर डेपसचॉक इलाके को लेकर दोनों देशों की सेनाओं के बीच अभी भी गतिरोध कायम है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा के अनुसार, बफर जोन बड़े पैमाने पर उन क्षेत्रों में हैं, जिन्हें भारत अपना क्षेत्र मानता है। एक अधिकारी ने स्वीकार किया, "यह हमारे सैनिकों के लिए सामरिक रूप से नुकसानदेह है, क्योंकि अब वे उन क्षेत्रों में गश्त नहीं कर सकते, जहां वे पहले जाते थे।"

इस पर राहुल गांधी ने कहा कि चीन ने अप्रैल 2020 की यथास्थिति बहाल करने की भारत की मांग को मानने से इनकार कर दिया है। प्रधानमंत्री ने बिना किसी लड़ाई के चीन को 1000 वर्ग किलोमीटर जमीन दे दी है।

उन्होंने पूछा है कि क्या भारत सरकार बता सकती है कि इस क्षेत्र को कैसे पुनः प्राप्त किया जाएगा? 

BY - एकदा_जंबूद्वीपे